नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने आईफोन (iPhone) इस्तेमाल करने वालों को निशाना बनाने वाले एक बड़े मोबाइल लूट और बिक्री रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके कब्जे से 66 चोरी के आईफोन बरामद हुए हैं। यह घटना बताती है कि महंगे मोबाइल फोन चुराने वाले गिरोह अब काफी शातिर हो गए हैं।
गिरफ्तार आरोपी और बरामद फोन
पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों की पहचान समीर (23), सुहेल (23) और जहीर उर्फ सलमान (36) के तौर पर की है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह खासतौर पर आईफोन चुराता था और फिर उन्हें खरीदारों के एक नेटवर्क के ज़रिए अनधिकृत बाजारों में बेच देता था। बरामद हुए 66 मोबाइल फोनों में बड़ी संख्या में आईफोन शामिल हैं, जो इन फोन की अवैध बाजारों में मांग को दर्शाता है।
एक स्नैचिंग की घटना से हुई शुरुआत
इस मामले की जांच 18 अप्रैल को सरई काले खां इलाके में आईपी पार्क के पास हुई एक मोबाइल लूट की घटना के बाद शुरू हुई। उस घटना में, बाइक सवार दो बदमाशों ने एक व्यक्ति से उसका आईफोन 17 प्रो छीन लिया था। इस मामले में सनलाइट कॉलोनी थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई, जिसके बाद पुलिस ने इस केस को सुलझाने के लिए एक खास टीम बनाई। टीम ने सीसीटीवी फुटेज खंगालने, स्थानीय मुखबिरों से जानकारी जुटाने और तकनीकी निगरानी जैसे कई तरीके अपनाए।
आरोपियों की गिरफ्तारी और गिरोह का खुलासा
जांच के दौरान, पुलिस ने सबसे पहले समीर और सुहेल को पकड़ा। पूछताछ में दोनों ने बताया कि सरई काले खां वाली घटना में चुराया गया आईफोन आगे बेचने के लिए जहीर उर्फ सलमान को दे दिया गया था। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने पुरानी दिल्ली के चांदनी महल इलाके से जहीर उर्फ सलमान को गिरफ्तार किया। जब उसकी तलाशी ली गई तो उसके घर से 64 और चोरी के मोबाइल फोन मिले, जिससे कुल बरामद फोनों की संख्या 66 हो गई।
गिरोह का तरीका और अनधिकृत बिक्री
जांच से यह भी पता चला है कि यह गिरोह आईफोन को इसलिए निशाना बनाता था क्योंकि इन फोनों की रीसेल वैल्यू (पुनर्विक्रय मूल्य) ज्यादा होती है। चोरी के फोन को फिर अनधिकृत बाजारों में बेच दिया जाता था, जहां खरीदारों का एक नेटवर्क सक्रिय था। यह तरीका चोरी के महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामानों को ठिकाने लगाने के लिए अक्सर अपनाया जाता है, क्योंकि इससे अपराधियों को मुनाफा कमाने और सामान की असलियत छुपाने में मदद मिलती है।
दिल्ली में मोबाइल चोरी का बढ़ता \n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n\n
