आजम खान को 2019 के बयान पर दो साल की जेल, ₹5,000 का जुर्माना
उत्तर प्रदेश के रामपुर की एक अदालत ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को 2019 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में दोषी करार देते हुए दो साल की सश्रम कारावास और ₹5,000 के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला भोट थाने में दर्ज मामले से जुड़ा है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आजम खान ने 2019 के आम चुनावों के दौरान एक जनसभा में तत्कालीन जिला अधिकारी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक बयान दिए थे। इन बयानों की वीडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसके चलते काफी आलोचना हुई और संबंधित अधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
अभियोजन के वकील, स्वदेश शर्मा ने बताया कि अदालत का यह फैसला पुख्ता दस्तावेजी और मौखिक सबूतों पर आधारित है, जिसमें गवाहों के बयान और वीडियो फुटेज शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के समय आदर्श आचार संहिता लागू थी। आजम खान को पहले भी चुनाव प्रचार के दौरान प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था, और एक बार लिखित माफी मांगने के बावजूद उन्होंने इसी तरह का दुर्व्यवहार दोहराया, जिसके परिणामस्वरूप यह आपराधिक मामला सामने आया।
यह सजा आजम खान के सामने कानूनी चुनौतियों की एक श्रृंखला में एक और कड़ी है। पिछले कुछ सालों में उन्हें कई अन्य मामलों में भी दोषी ठहराया गया है, जिनमें जमीन पर कब्जे, दस्तावेजों की जालसाजी और चुनावी अपराध शामिल हैं। नवंबर 2025 में, दो अलग-अलग जन्मतिथियों वाले पैन कार्ड हासिल करने के एक अलग मामले में, आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को सात साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। इससे पहले भी उन्हें घर में तोड़फोड़ के एक मामले में और 2016 में जमीन पर अतिक्रमण के एक मामले में दस साल की जेल और भारी जुर्माने की सजा मिल चुकी है।
हालांकि, इन सजाओं के बावजूद, आजम खान को कुछ कानूनी राहत भी मिली है। दिसंबर 2025 में, रामपुर की एक विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय सेना के जवानों के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में उन्हें बरी कर दिया था, जिसका मुख्य कारण अपर्याप्त सबूत थे। फिर भी, अन्य मौजूदा सजाओं के कारण वह फिलहाल जेल में हैं।
समाजवादी पार्टी के एक प्रमुख नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे आजम खान दशकों से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्ती रहे हैं। उन्होंने रामपुर सदर विधानसभा सीट से कई बार विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व किया है। उनके कानूनी मामलों ने उनके राजनीतिक करियर को काफी प्रभावित किया है, और पिछली सजाओं के बाद उन्हें अपनी विधानसभा सीट से भी अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
