उत्तर प्रदेश में बकरीद का त्योहार शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने पुख्ता इंतजाम किए हैं. संवेदनशील इलाकों में विशेष चौकसी बरती जा रही है. सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए फ्लैग मार्च, पैदल गश्त और ड्रोन से निगरानी का सहारा लिया जा रहा है.
संवेदनशील जिलों में कड़ी सुरक्षा
बकरीद के मद्देनजर सूबे के कई जिलों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. इनमें संभल, मेरठ, सहारनपुर, रामपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़, बरेली, बहराइच, वाराणसी और अयोध्या जैसे इलाके शामिल हैं. इन क्षेत्रों में प्रांतीय सशस्त्र पुलिस (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों को तैनात किया गया है. इसके साथ ही, जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरों से भी बारीक नजर रखी जा रही है. आला अधिकारी लगातार सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर रहे हैं और पुलिसकर्मियों को किसी भी हालत में कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं. सहारनपुर पुलिस ने विश्वास दिलाया है कि लगातार गश्त, सतर्क निगरानी और जरूरी सुरक्षा इंतजामों से त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाया जाएगा. लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने की अपील भी की गई है.
मेरठ पुलिस ने शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए मुख्य बाजारों और सड़कों पर पैदल गश्त की. इसी तरह, रामपुर में जिला अधिकारी ने शहर की मुख्य सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में फ्लैग मार्च का नेतृत्व किया. सहारनपुर के चिलकाना सहित कई इलाकों में भी फ्लैग मार्च निकाले गए, जहां अधिकारियों ने स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों और आम जनता से मिलकर त्योहार के दौरान भाईचारा और कानून व्यवस्था बनाए रखने की महत्ता पर जोर दिया.
बकरीद के लिए दिशा-निर्देश और पाबंदियां
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बकरीद से पहले कानून व्यवस्था के कड़े अनुपालन के निर्देश जारी किए हैं. सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि की इजाजत नहीं होगी, और बलि केवल निर्धारित स्थानों पर ही दी जाएगी. प्रतिबंधित पशुओं की बलि पर सख्त मनाही है, और अधिकारियों को अवैध बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है. मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि नमाज के लिए सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया जाना चाहिए, और नमाज केवल पारंपरिक और निर्धारित स्थलों पर ही पढ़ी जाए. त्योहार के दौरान नई परंपराओं को बढ़ावा नहीं देने की हिदायत भी दी गई है. इसके अलावा, अधिकारियों को बलि के बाद उचित अपशिष्ट निपटान सुनिश्चित करने और मांस की खुली बिक्री पर रोक लगाने का भी काम सौंपा गया है.
लखनऊ में, कसमंडी इलाके में एक नमाज स्थल को लेकर हुए विवाद के बाद, अधिकारियों ने संभावित सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए उस स्थान पर ईद-उल-अजहा की नमाज की अनुमति नहीं दी. इस इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जिसमें बैरिकेडिंग, ड्रोन निगरानी और सीसीटीवी की व्यवस्था शामिल है. अधिकारियों ने दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें की हैं ताकि स्थिति को शांत किया जा सके.
व्यापक सुरक्षा और सोशल मीडिया पर पैनी नजर
शांतिपूर्ण उत्सव सुनिश्चित करने के लिए, अधिकारी ड्रोन निगरानी और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक पैदल गश्त का उपयोग करके निगरानी बढ़ा रहे हैं. आगरा में, एक बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें शहर को विभिन्न क्षेत्रों और उप-क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, और अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों को रणनीतिक बिंदुओं पर तैनात किया गया है. संवाद को बढ़ावा देने और चिंताओं को दूर करने के लिए सभी पुलिस स्टेशनों में शांति समिति की बैठकें आयोजित की जा रही हैं. पुलिस गलत सूचना, अफवाहों या भड़काऊ सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की बारीकी से निगरानी कर रही है, और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है. पूरे राज्य में त्योहार को शांतिपूर्वक मनाए जाने और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है.
