शिवमोग्गा जिले से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के 47 मामले सुलझाए जाएंगे
शिवमोग्गा, कर्नाटक: कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले से जुड़े ऐसे 47 मामलों को सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता के ज़रिए सुलझाने के लिए चुना गया है। यह एक बड़ी राहत है उन लोगों के लिए जो लंबे समय से न्याय का इंतज़ार कर रहे थे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, शिवमोग्गा ने इस बात की जानकारी दी है। इन सभी मामलों को ‘समाधान समारोह’ के तहत निपटाया जाएगा। यह समारोह मध्यस्थता और समाधान के लिए चलाया जा रहा एक विशेष अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य मध्यस्थता के सिद्धांतों का उपयोग करके कानूनी विवादों को तेज़ी से हल करना है।
भारत में मध्यस्थता का चलन लगातार बढ़ रहा है। अदालतों ने भी वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) के तरीकों को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी ‘सलेम बार एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ जैसे मामलों में मध्यस्थता के महत्व पर ज़ोर दिया है। कोर्ट का मानना है कि मध्यस्थता से मामलों का निपटारा जल्दी होता है। इस दिशा में, मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति (MCPC) की स्थापना ने न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को और मज़बूत किया है।
मध्यस्थता के लिए कानूनी ढांचा भी धीरे-धीरे विकसित हो रहा है। दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 और वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 जैसे कानूनों में इसके प्रावधान मौजूद हैं। हाल ही में, प्रस्तावित मध्यस्थता विधेयक का उद्देश्य एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करना है। यह विधेयक सुलह समझौतों को कानूनी मान्यता देगा और उन्हें लागू करने योग्य बनाएगा। साथ ही, यह अदालतों पर बोझ कम करने के लिए मुकदमेबाजी से पहले मध्यस्थता को प्रोत्साहित करेगा।
अदालतों से जुड़ी मध्यस्थता (Court-annexed mediation) भी अब आम होती जा रही है। इन केंद्रों में नियुक्त मध्यस्थ अक्सर बिना किसी शुल्क के पार्टियों के बीच बातचीत करवाते हैं। मध्यस्थ दोनों पक्षों से अलग-अलग या एक साथ बात करके उन्हें आपसी सहमति से हल निकालने में मदद करते हैं। यदि कोई समझौता हो जाता है, तो उसे लिखित रूप में दर्ज किया जाता है और संबंधित अदालत को सौंप दिया जाता है। अदालत फिर उस समझौते के आधार पर फैसला सुनाती है।
देश भर में चलाए जा रहे मध्यस्थता अभियानों ने भी हज़ारों मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और सुप्रीम कोर्ट की MCPC के संयुक्त तत्वावधान में चलाए गए ‘नेशन फॉर नेशन’ जैसे अभियानों के अच्छे परिणाम मिले हैं। हाल ही में कर्नाटक में 90 दिनों के एक अभियान में, विभिन्न स्तरों की अदालतों में 5,500 से अधिक मामले सुलझाए गए। इनमें वैवाहिक मामले, संपत्ति बंटवारे के मुकदमे, मोटर वाहन दुर्घटना के दावे और वाणिज्यिक विवाद शामिल थे। इन अभियानों से यह स्पष्ट होता है कि मध्यस्थता मामलों के बैकलॉग को कम करने और प्रभावी ढंग से विवादों को हल करने का एक सशक्त माध्यम है।
