सिद्धारमैया का कर्नाटक सीएम के तौर पर कार्यकाल पूरा, शिवकुमार उप-मुख्यमंत्री बने रहेंगे
बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है। राज्य की कमान संभालने के बाद से उनका सफर राजनीतिक दांव-पेंचों और पार्टी के भीतर की उठापटक से भरा रहा। इस बीच, उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार अपनी भूमिका में बने हुए हैं। यह स्थिति 2023 के राज्य विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की शानदार जीत के बाद के घटनाक्रमों को दर्शाती है।
कांग्रेस पार्टी ने 224 सदस्यीय विधानसभा में 135 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। इस निर्णायक जीत के बाद, मुख्यमंत्री के पद के लिए सिद्धारमैया और उप-मुख्यमंत्री के पद के लिए शिवकुमार का चुनाव पार्टी के भीतर गहन मंथन का परिणाम था।
चुनाव नतीजों के बाद मई 2023 में, ऐसे संकेत मिल रहे थे कि दोनों नेताओं के बीच सत्ता का बंटवारा हो सकता है, जिसमें तय अवधि के लिए दोनों बारी-बारी से सरकार का नेतृत्व करेंगे। इस नेतृत्व के सवाल को सुलझाने के लिए बेंगलुरु और नई दिल्ली में कई दौर की चर्चाएं हुईं, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे।
आखिरकार, 18 मई 2023 को कांग्रेस विधायक दल ने औपचारिक रूप से सिद्धारमैया को अपना नेता और मुख्यमंत्री चुना। इसके बाद, उन्होंने डी.के. शिवकुमार को एकमात्र उप-मुख्यमंत्री बनाते हुए सरकार बनाने का दावा पेश किया। नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 20 मई 2023 को बेंगलुरु के कांतीरवा स्टेडियम में संपन्न हुआ।
अपने कार्यकाल के दौरान, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप-मुख्यमंत्री शिवकुमार के बीच संबंध राजनीतिक चर्चा का विषय बने रहे। समय-समय पर ऐसी खबरें आती रहीं कि सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है और उप-मुख्यमंत्री शिवकुमार के समर्थक, खासकर सरकार के आधे कार्यकाल के आसपास, नेतृत्व परिवर्तन के लिए लॉबिंग कर रहे थे। इन रिपोर्टों में अक्सर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ नई दिल्ली में बैठकों का उल्लेख होता था।
इन रिपोर्टों के बावजूद, दोनों नेताओं ने आधिकारिक तौर पर एकजुटता का प्रदर्शन किया और कर्नाटक में पार्टी के एजेंडे व सुशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। सरकार ने कांग्रेस पार्टी के वादे के अनुसार ‘पांच गारंटियों’ को लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया, जो उनके चुनाव अभियान का मुख्य बिंदु थीं। इन गारंटियों में समाज के विभिन्न वर्गों को लक्षित करने वाली कल्याणकारी और सब्सिडी योजनाएं शामिल थीं।
कर्नाटक की राजनीतिक तस्वीर, जैसा कि कई भारतीय राज्यों में होता है, अक्सर पार्टी के भीतर की जटिल गतिशीलता से पहचानी जाती है। 2023 में कांग्रेस की जीत को एक महत्वपूर्ण वापसी के रूप में देखा गया। विश्लेषकों ने इस सफलता का श्रेय, आंशिक रूप से, स्थानीय नेतृत्व और मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने को दिया। सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों ही अभियान के प्रमुख चेहरे थे, जिन्होंने पूरे राज्य में समर्थन जुटाया।
पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी शामिल हैं, की भूमिका पार्टी के आंतरिक फैसलों को सुलझाने और सामंजस्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण रही है। उनके परामर्श और निर्णयों ने राज्य सरकार के गठन और उसके निरंतरता का मार्गदर्शन किया है।
जैसे-जैसे निश्चित अवधि का अंत हो रहा है, ध्यान कर्नाटक के भविष्य के राजनीतिक मार्ग और कांग्रेस पार्टी की आगे की रणनीति पर केंद्रित हो गया है, जबकि वर्तमान नेतृत्व संरचना यथावत बनी हुई है।
