आंध्र प्रदेश: 2 साल में 6 वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, कचरे से ऊर्जा का नया गान।

भारतआंध्र प्रदेश: 2 साल में 6 वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, कचरे से ऊर्जा का नया गान।

आंध्र प्रदेश में दो साल के भीतर छह नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट तैयार हो जाएंगे। यह जानकारी राज्य के नगर प्रशासन और शहरी विकास मंत्री पोंगुरु नारायण ने दी। इन संयंत्रों का मुख्य उद्देश्य शहर से निकलने वाले ठोस कचरे का बेहतर प्रबंधन करना और नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना है।

कचरा प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर

राज्य सरकार पर्यावरण की सुरक्षा, शहरी स्वच्छता में सुधार और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए ठोस कचरे के वैज्ञानिक निपटान को प्राथमिकता दे रही है। वर्तमान में, विशाखापत्तनम और गुंटूर में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट संचालित हैं, जो प्रतिदिन लगभग 35 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं और करीब 2,800 टन कचरे का प्रसंस्करण करते हैं। छह नए संयंत्रों के जुड़ने से राज्य की कचरा निपटान क्षमता में काफी वृद्धि होगी।

नए संयंत्रों की स्थापना का विवरण

नए संयंत्र नेल्लोर (डोंथली, 12 मेगावाट), काकीनाडा (रामेश्वरम, 15 मेगावाट), कडपा (कोलमुलापल्ली, 15 मेगावाट) और कुरनूल (गरवेपुरम, 15 मेगावाट) में स्थापित किए जाएंगे। काकीनाडा और नेल्लोर के संयंत्र जिन्दल द्वारा लगाए जाएंगे, जबकि कडपा और कुरनूल के संयंत्र एंथनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किए जाएंगे। इन चार संयंत्रों से प्रतिदिन लगभग 3,093 मीट्रिक टन ठोस कचरे का प्रसंस्करण होने की उम्मीद है। इसके अलावा, विजयवाड़ा और तिरुपति के लिए भी वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है, जिनसे प्रतिदिन 1,600 टन अतिरिक्त कचरे का प्रबंधन होगा। जब सभी आठ संयंत्र चालू हो जाएंगे, तो इनसे प्रतिदिन लगभग 7,493 टन कचरे का प्रसंस्करण होगा और 119 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।

विरासत में मिले कचरे का निपटान और पर्यावरणीय लक्ष्य

मंत्री नारायण ने कहा कि राज्य का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक कचरा-मुक्त बनना है। इसके लिए पिछली सरकार द्वारा जमा किए गए भारी मात्रा में कचरे को साफ करने की योजना है। पिछली सरकार पर राज्य भर में लगभग 85 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा छोड़ने का आरोप है। इस नई पहल का उद्देश्य इस “कचरे को धन में बदलना” है, जिससे पर्यावरणीय चिंताओं को दूर किया जा सके और सतत विकास में योगदान दिया जा सके।

बिजली खरीद समझौते और परियोजना ढाँचा

इन नए वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों के लिए बिजली खरीद समझौते (पीपीए) अंतिम रूप दिए जा चुके हैं। इसके तहत, उत्पन्न बिजली को राज्य की बिजली वितरण कंपनियों द्वारा खरीदा जाएगा। आंध्र प्रदेश सदर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (APSPDCL) नेल्लोर, कडपा और कुरनूल के संयंत्रों से बिजली खरीदेगी, जबकि आंध्र प्रदेश ईस्टर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (APEPDCL) काकीनाडा के संयंत्र से बिजली का अधिग्रहण करेगी। इस व्यवस्था से सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत इन नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के कुशल संचालन और प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है।

व्यापक शहरी विकास पहल

इन वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों का विकास आंध्र प्रदेश के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह राष्ट्रीय स्वच्छता और स्थिरता के लक्ष्यों के अनुरूप है। इन परियोजनाओं के निर्माण में, रियायत समझौते पर हस्ताक्षर, पीपीए निष्पादन या भूमि हस्तांतरण, जो भी बाद में हो, से 24 महीने का समय लगने की उम्मीद है। एक बार चालू होने के बाद, ये संयंत्र 20 साल के रियायत समझौते के तहत काम करेंगे।

मंत्री ने अन्य शहरी विकास पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें AMRUT योजना के तहत तीन वर्षों के भीतर हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना और अमरावती राजधानी शहर का चल रहा विकास शामिल है। ये प्रयास आंध्र प्रदेश में शहरी जीवन स्तर और पर्यावरणीय स्थिरता में सुधार के लिए सरकार के व्यापक दृष्टिकोण को रेखांकित करते हैं।

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