ठाणे-मुलुंड नई लाइन, सीएम खुश, यात्रियों की जय!

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने <a href="/%e0%a4%90%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82/" title="ऐरोली-कटाई का काम पूरा, मुंबई के सफर में तेज़ी का वादा!”>ठाणे और मुलुंड के बीच नए रेलवे स्टेशन को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने पर खुशी जताई है। यह फैसला मुंबई के उपनगरीय रेल नेटवर्क के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को इस नए स्टेशन के निर्माण को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जो मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और भीड़भाड़ कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नए स्टेशन को मिली बड़ी हरी झंडी

यह मंजूरी एक ऐसे प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ी सफलता है, जिस पर कई सालों से चर्चा चल रही थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस सैद्धांतिक मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल से एमएमआर में परिवहन व्यवस्था और अधिक कुशल और गतिशील बनेगी।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह नया स्टेशन ठाणे और मुलुंड के बीच पश्चिमी तरफ, ठाणे मानसिक अस्पताल की लगभग 14.83 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। 2019 के आसपास शुरू हुई इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ठाणे और मुलुंड रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के भारी दबाव को कम करना है।

कनेक्टिविटी बढ़ेगी, यात्रियों का बोझ घटेगा

प्रस्तावित स्टेशन से हर दिन यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे उपनगरीय रेल संपर्क में सुधार होगा और मुंबई के सबसे व्यस्त रेल गलियारों में से एक पर पड़ने वाले दबाव में काफी कमी आएगी। घोड़बंदर रोड, पोखरण रोड और वागले एस्टेट जैसे इलाके, जिन्हें वर्तमान में मौजूदा रेल नेटवर्क तक पहुंचने में कठिनाई होती है, नए स्टेशन की निकटता से बहुत लाभान्वित होंगे।

इस परियोजना की योजना और मंजूरी के कई चरण रहे हैं। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, नया स्टेशन ठाणे स्टेशन पर यात्रियों के लोड को लगभग 31% और मुलुंड स्टेशन पर लगभग 24% तक कम कर सकता है। निर्माण कार्य को दो भागों में बांटा जाएगा: रेलवे परिचालन क्षेत्र, जिसे सेंट्रल रेलवे संभालेगा और इसके लिए ठाणे स्मार्ट सिटी लिमिटेड धन मुहैया कराएगी, और सर्कुलेटिंग एरिया का विकास, जिसे ठाणे स्मार्ट सिटी लिमिटेड अपने हाथ में लेगी।

पृष्ठभूमि और भविष्य की राह

इस गलियारे में एक नए स्टेशन की मांग काफी समय से चली आ रही थी, जिसे स्थानीय नेताओं द्वारा यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने की वकालत के बाद आगे बढ़ाया गया। लागत बढ़ने के कारण परियोजना में कई बार देरी हुई, 2016 के शुरुआती अनुमानों में काफी वृद्धि हुई। रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना की अनुमानित लागत 127 करोड़ रुपये से बढ़कर 250 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जो इसके निष्पादन को अनिश्चित काल के लिए टालने का कारण बन सकती थी।

शिवसेना ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास किया था। पार्टी के सांसदों ने रेल मंत्री से मुलाकात कर रेलवे से परियोजना निष्पादन अपने हाथ में लेने का आग्रह किया था, खासकर नगर निगम द्वारा सामना की जा रही वित्तीय बाधाओं का हवाला देते हुए। समझौते के अनुसार, रेलवे स्टेशन और उससे जुड़ी सेवाओं का निर्माण करेगा, जबकि ठाणे निगम पार्किंग सुविधाओं जैसे बाहरी बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के साधनों को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगा।

इस नए स्टेशन पर उपनगरीय ट्रेनों के लिए कई प्लेटफॉर्म की योजना बनाई गई है। यह विकास मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क की दक्षता और क्षमता को बढ़ाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य यात्री भार को अधिक प्रभावी ढंग से वितरित करना और क्षेत्र में बड़ी संख्या में यात्रियों के लिए यात्रा के समय को कम करना है।

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