केजरीवाल का पीएम से सवाल: ‘अर्थव्यवस्था क्यों डांवाडोल, जनता से क्यों कंजूसी’?

भारतकेजरीवाल का पीएम से सवाल: 'अर्थव्यवस्था क्यों डांवाडोल, जनता से क्यों कंजूसी'?

नई दिल्ली, 12 मई: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर श्वेत-पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब अर्थव्यवस्था की हालत खस्ताहाल है, तो आम जनता से ही मितव्ययिता (कंजूसी) अपनाने के सात कड़े कदम उठाने की सलाह क्यों दी जा रही है।

‘द चिनाब टाइम्स’ को मिली जानकारी के अनुसार, एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि देश ने पहले भी युद्ध जैसी कई मुश्किल घड़ियों का सामना किया है, लेकिन किसी भी प्रधानमंत्री ने जनता से ऐसे सात विशिष्ट और कड़े उपाय अपनाने को नहीं कहा, जैसा कि पीएम मोदी ने कहा है। उन्होंने यह भी अंदेशा जताया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा मौजूदा तनाव इन निर्देशों का एक कारण हो सकता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि देश की कमजोर होती अर्थव्यवस्था के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने खास तौर पर यह सवाल उठाया कि त्याग और बलिदान का बोझ केवल मध्यम वर्ग पर ही क्यों डाला जा रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि मितव्ययिता की यह अपील प्रधानमंत्री, उनके मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों या देश के सबसे अमीर लोगों तक क्यों नहीं पहुंच रही। केजरीवाल का मानना है कि त्याग का दायरा और विस्तृत होना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने का आग्रह किया था। इसमें सोना जैसी कीमती धातुओं की खरीदारी कम करना, विदेशी यात्राओं को सीमित करना और पेट्रोल-डीजल जैसे पेट्रोलियम उत्पादों की खपत बचाना शामिल था। इन अपीलों की विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की है। उनका मानना है कि ये उपाय आर्थिक कुप्रबंधन और नीतियों की विफलता का संकेत देते हैं।

केजरीवाल के बयान अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार की रणनीति और राष्ट्रीय वित्तीय चुनौतियों के बारे में जनता के साथ संवाद पर एक राजनीतिक बहस को उजागर करते हैं। आम आदमी पार्टी के नेता की टिप्पणियां विपक्ष के उस रुख को दर्शाती हैं जो आर्थिक बोझ के वितरण और आर्थिक रिपोर्टिंग में पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।

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