नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने खरीफ फसलों की एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) में बढ़ोतरी का एलान किया है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 2026-27 विपणन सत्र के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के पीछे किसानों को उनकी उपज का बेहतर और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है।
‘द चिनाब टाइम्स’ को मिली जानकारी के अनुसार, सूरजमुखी के बीज के न्यूनतम समर्थन मूल्य में सबसे अधिक वृद्धि की गई है। इसके एमएसपी में प्रति क्विंटल 622 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद कपास का स्थान है, जिसके एमएसपी में प्रति क्विंटल 557 रुपये का इजाफा हुआ है। नाइजरसीड (तिलहन) के एमएसपी में 515 रुपये प्रति क्विंटल और तिल के एमएसपी में 500 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
सामान्य धान के लिए एमएसपी 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले सत्र की तुलना में 72 रुपये अधिक है। वहीं, ग्रेड ए धान की खरीद 2,461 रुपये प्रति क्विंटल पर की जाएगी।
दलहनी फसलों की बात करें तो, अरहर (जिसे तुअर भी कहते हैं) का एमएसपी बढ़ाकर 8,450 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। मूंग का समर्थन मूल्य 8,780 रुपये प्रति क्विंटल और उड़द का 8,200 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा।
तिलहन फसलों में, सूरजमुखी के बीज का एमएसपी अब 8,343 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। सोयाबीन की खरीद 5,708 रुपये प्रति क्विंटल पर होगी, जबकि तिल का एमएसपी 10,346 रुपये प्रति क्विंटल होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधित एमएसपी 2018-19 के केंद्रीय बजट में की गई प्रतिबद्धता के अनुरूप है। इस बजट में यह तय किया गया था कि समर्थन मूल्य उत्पादन की भारित औसत लागत से कम से कम डेढ़ गुना रखा जाएगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, उत्पादन लागत पर सबसे अधिक अपेक्षित रिटर्न मूंग पर मिल रहा है, जो 61 प्रतिशत है। बाजरा और मक्का प्रत्येक पर 56 प्रतिशत रिटर्न मिलने का अनुमान है, जबकि तुअर पर उत्पादन लागत से 54 प्रतिशत रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार दलहनी फसलों, तिलहनों और पोषक-अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इन विशेष फसलों पर अपेक्षाकृत अधिक एमएसपी की पेशकश कर रही है। इस रणनीति का उद्देश्य कृषि उत्पादन में विविधता लाना और पोषण सुरक्षा को बढ़ाना है।
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2025-26 की अवधि के दौरान 14 खरीफ फसलों की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो 8,746 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई। यह 2004-05 और 2013-14 के बीच 4,679 लाख मीट्रिक टन की खरीद की तुलना में एक बड़ी छलांग है।
सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले एक दशक में खरीफ फसलों के लिए किसानों को एमएसपी के तहत भुगतान में काफी वृद्धि हुई है। अकेले धान उत्पादक किसानों को 2014-15 और 2025-26 विपणन सत्रों के बीच कुल 16.08 लाख करोड़ रुपये मिले हैं, जो कृषि क्षेत्र को दिए गए वित्तीय समर्थन में बढ़ोतरी को दर्शाता है।
