चेन्नई में बी.कॉम सीट पर भारी मार, कंप्यूटर कोर्स की बढ़ी बहार

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चेन्नई में बी.कॉम की सीटों के लिए मारामारी, कंप्यूटर कोर्सेज की बढ़ी मांग

चेन्नई: इस साल चेन्नई में बैचलर ऑफ कॉमर्स (बी.कॉम) में दाखिला लेने के इच्छुक छात्रों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। आवेदनों की भारी संख्या के चलते कट-ऑफ अंकों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जिससे बी.कॉम की सीट पाना और भी मुश्किल हो गया है। इस बढ़ती कठिनाई को देखते हुए, कई छात्र कंप्यूटर से जुड़े कोर्स, जैसे बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन्स (बीसीए) और बीएससी कंप्यूटर साइंस, को अपनी पहली पसंद के तौर पर देख रहे हैं।

कॉमर्स की पढ़ाई की बढ़ती मांग ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा

चेन्नई के कॉलेजों में बी.कॉम कार्यक्रमों के लिए आवेदनों की ऐसी बाढ़ आई है, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया। इसके परिणामस्वरूप, दाखिले की कट-ऑफ में भारी उछाल आया है। कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों में तो बी.कॉम के लिए कट-ऑफ 100% तक पहुँच गई है। ऐसे में, बेहतरीन अंक लाने वाले छात्रों को भी सीट मिलना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। उदाहरण के लिए, एथिराज कॉलेज फॉर वुमेन और मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में बी.कॉम के लिए ओपन कैटेगरी की कट-ऑफ 100% को छू गई है। लॉयला कॉलेज, डी.जी. वैष्णव कॉलेज और कई अन्य जाने-माने संस्थानों ने भी 90% से ऊपर की कट-ऑफ दर्ज की है।

इस कड़ी प्रतिस्पर्धा की वजह 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में बड़ी संख्या में छात्रों का अच्छे अंक लाना है, खासकर कॉमर्स और अर्थशास्त्र जैसे विषयों में। उच्च अंक लाने वाले छात्रों की इस भीड़ ने स्वाभाविक रूप से सभी श्रेणियों में कट-ऑफ प्रतिशत को ऊपर धकेल दिया है। कॉलेजों को सीमित सीटों के लिए हज़ारों आवेदन मिल रहे हैं, जिससे बी.कॉम की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए घोर प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार हो गया है।

‘द चिनाब टाइम्स’ को मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ सालों से बी.कॉम और बीबीए (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) कोर्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इस बढ़ती लोकप्रियता के पीछे अकाउंटिंग, फाइनेंस, मार्केटिंग और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में व्यापक करियर की संभावनाओं को देखा जा रहा है। हालांकि, जब अधिक छात्र एक ही सीट के लिए होड़ करते हैं, तो प्रवेश प्रक्रिया और भी कठिन हो जाती है।

कंप्यूटर कोर्सेज बने भरोसेमंद विकल्प

बी.कॉम सीटों के लिए बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा के जवाब में, छात्र अब कंप्यूटर से जुड़े विषयों की ओर तेज़ी से रुख कर रहे हैं। बीएससी कंप्यूटर साइंस, बीसीए और बीएससी साइबर सुरक्षा जैसे कोर्स में आवेदनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। यह बदलाव छात्रों द्वारा वैकल्पिक शैक्षणिक रास्ते तलाशने की एक रणनीतिक चाल को दर्शाता है, जो उन्हें प्रौद्योगिकी क्षेत्र में मजबूत करियर के अवसर प्रदान करते हैं।

एथिराज कॉलेज फॉर वुमेन जैसे संस्थानों ने बी.कॉम के लिए भारी संख्या में आवेदन प्राप्त करने के साथ-साथ अपने बीसीए और नए शुरू किए गए बीएससी साइबर सुरक्षा कार्यक्रमों में भी काफी रुचि दर्ज की है। इसी तरह, मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज और लॉयला कॉलेज ने भी अपने कंप्यूटर साइंस और बीसीए कार्यक्रमों के लिए आवेदनों की महत्वपूर्ण आमद देखी है। इनमें कॉमर्स पृष्ठभूमि के छात्र भी बड़ी संख्या में आवेदन कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति कंप्यूटर से जुड़े योग्यताओं के महत्व और रोज़गार क्षमता की बढ़ती पहचान का संकेत देती है।

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना ​​है कि टेक-सक्षम पेशेवरों के लिए मज़बूत नौकरी बाज़ार, साथ ही इन कोर्सों की अंतःविषय प्रकृति जो कॉमर्स और प्रौद्योगिकी को जोड़ती है, उन्हें आकर्षक विकल्प बनाती है। कई कॉलेज अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस और साइबर सुरक्षा जैसे विशेष कंप्यूटर कोर्स पेश कर रहे हैं, जो भविष्य के लिए आवश्यक कौशल चाहने वाले छात्रों के लिए उनकी अपील को और बढ़ाते हैं।

छात्रों की बदलती प्राथमिकताएं और भविष्य का नज़रिया

चेन्नई में छात्रों की बदलती प्राथमिकताएं तेजी से डिजिटल होती दुनिया के अनुकूल होने के व्यापक रुझान को उजागर करती हैं। हालांकि पारंपरिक वाणिज्य शिक्षा अभी भी लोकप्रिय है, लेकिन विभिन्न उद्योगों में प्रौद्योगिकी के एकीकरण ने उन कोर्सों में रुचि जगाई है जो छात्रों को व्यावसायिक सूझबूझ और तकनीकी दक्षता दोनों से लैस करते हैं। इसके कारण अकाउंटिंग एंड फाइनेंस जैसी बी.कॉम विशेषज्ञताओं और कंप्यूटर एप्लीकेशन्स के साथ बी.कॉम में आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कॉलेज बीए पॉलिटिकल साइंस और बीए इकोनॉमिक्स जैसे विषयों में रुचि का पुनरुद्धार भी देख रहे हैं, जो छात्रों के बीच विविध शैक्षणिक आकांक्षाओं का संकेत देता है। इसके बावजूद, बी.कॉम और कंप्यूटर से जुड़े कोर्सों की लगातार उच्च मांग चेन्नई के शैक्षिक परिदृश्य में उनकी निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित करती है। आने वाले वर्षों में आवेदनों की यह बढ़त जारी रहने की उम्मीद है, जिससे कट-ऑफ और भी ऊंचे जा सकते हैं, और

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