अरुणाचल में छात्र बोले: स्वदेशी हक़, पहचान, खो न जाएं!

जम्मू और कश्मीरअरुणाचल में छात्र बोले: स्वदेशी हक़, पहचान, खो न जाएं!

अरुणाचल प्रदेश के छात्र संघ ने मुख्यमंत्री से की स्वदेशी अधिकारों और पहचान की सुरक्षा की मांग

ईटानगर, 2 जून: ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (AAPSU) ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू को 13 सूत्रीय एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इसमें राज्य के स्वदेशी समुदायों के अधिकारों, पहचान, भूमि और राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल संवैधानिक, प्रशासनिक और विधायी उपायों की मांग की गई है। छात्र संघ ने जनसंख्या में बदलाव से बचाव और अनूठी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की पुरजोर आवश्यकता पर बल दिया है।

AAPSU ने मुख्यमंत्री को सौंपा विस्तृत ज्ञापन

“द चिनाब टाइम्स” को मिली जानकारी के अनुसार, AAPSU के अध्यक्ष मेजे ताकू और महासचिव माटो बुई के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पेमा खांडू से मुलाकात कर यह ज्ञापन सौंपा। इस दस्तावेज में अरुणाचल प्रदेश की स्वदेशी आबादी के हितों की रक्षा के लिए बने कानूनी और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से कई मांगों को रेखांकित किया गया है। छात्र संघ की चिंताएं राज्य के सांस्कृतिक ताने-बाने और मूल निवासियों के अधिकारों पर कथित खतरों से उपजी हैं।

ज्ञापन में विशेष रूप से स्वदेशी समुदायों के अधिकारों और उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के किसी भी क्षरण को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को लागू करने की तात्कालिकता को संबोधित किया गया है। AAPSU ने इस बात पर जोर दिया है कि ये सुरक्षा उपाय सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और राज्य के सतत विकास को लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। छात्र संघ के नेताओं ने संवैधानिक संशोधन और विधायी कार्रवाइयों की लंबे समय से चली आ रही मांग को उजागर किया, जो स्वदेशी समूहों को अधिक स्वायत्तता और सुरक्षा प्रदान करेंगी।

AAPSU की मांगों के केंद्र में भूमि अधिकारों का संरक्षण है, जो पूर्वोत्तर के आदिवासी समुदायों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है। छात्र संघ यह सुनिश्चित करना चाहता है कि स्वदेशी समुदायों की भूमि अतिक्रमण से पर्याप्त रूप से सुरक्षित रहे और भविष्य की विकास परियोजनाएं इन अधिकारों से समझौता न करें। ज्ञापन में राज्य के राजनीतिक भविष्य पर भी प्रकाश डाला गया है, जिसमें ऐसे“नीतियों की वकालत की गई है जो स्वदेशी प्रतिनिधियों को सशक्त बनाएं और यह सुनिश्चित करें कि निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी आवाजें केंद्रीय हों।

ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन राज्य के स्वदेशी लोगों के अधिकारों के लिए एक मुखर समर्थक रही है। सरकारी अधिकारियों के साथ इसकी लगातार भागीदारी, अरुणाचल प्रदेश की अनूठी सांस्कृतिक और सामाजिक भावना को बनाए रखने वाली नीतियों की वकालत करने की इसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। विस्तृत ज्ञापन सौंपने में छात्र संघ का सक्रिय दृष्टिकोण, संवाद और नीति वकालत के माध्यम से जटिल मुद्दों को संबोधित करने के एक ठोस प्रयास को प्रदर्शित करता है।

मुख्यमंत्री को प्रस्तुत 13-सूत्रीय चार्ट में आदिवासी अधिकारों की रक्षा करने वाले मौजूदा कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन, उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए नए“विधायन की“आवश्यकता, और स्वदेशी कल्याण को प्राथमिकता देने वाले कुशल शासन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक सुधारों सहित विभिन्न“मुद्दों को“शामिल“करने“की“समझ“है।“छात्र“संघ“ने“आदिवासी“भूमि“और“संसाधनों“को“प्रभावित“करने“वाले“मामलों“में“अधिक“पारदर्शिता“और“सार्वजनिक“परामर्श“की“भी“मांग“की“थी।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने ज्ञापन की प्राप्ति को स्वीकार किया और AAPSU प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि ज्ञापन की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जाएगी। सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के स्वदेशी समुदायों के कल्याण और“सुरक्षा के प्रति अपनी“प्रतिबद्धता“दोहराई।“प्रस्तावित“उपायों“की“व्यवहार्यता“और“कार्यान्वयन“पर“विचार-विमर्श“के“लिए“आगे“की“चर्चाएं“होने“की“उम्मीद“है।“AAPSU“ने“आशा“व्यक्त“की“है“कि“सरकार“ज्ञापन“में“उठाए“गए“मुद्दों“को“हल“करने“के“लिए“तेज“और“निर्णायक“कदम“उठायेगी,“जिससे“राज्य“की“स्वदेशी“आबादी“की“दीर्घकालिक“सुरक्षा“और“समृद्धि“सुनिश्चित“होगी।

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