कर्नाटक में महिला सुरक्षा: कार्यस्थलों पर कड़े निर्देश, आयोग का फरमान

भारतकर्नाटक में महिला सुरक्षा: कार्यस्थलों पर कड़े निर्देश, आयोग का फरमान

कर्नाटक में महिलाओं के कार्यस्थल की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम, आयोग ने जारी किए निर्देश

बेंगलुरु: कर्नाटक राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नागलक्ष्मी चौधरी ने प्रदेश के सभी संस्थानों को कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में पेशेवर माहौल में महिलाओं के प्रति यौन उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

द चिनाब टाइम्स को मिली जानकारी के अनुसार, चौधरी ने यह बात धारवाड़ में आयोजित एक प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कही। यह कार्यक्रम कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण (POSH) अधिनियम के तहत आयोजित किया गया था। कर्नाटक राज्य महिला आयोग और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि संस्थानों को ऐसी समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटना होगा।

चौधरी ने इस बात पर बल दिया कि महिलाओं को सुरक्षित कामकाजी माहौल प्रदान करना सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने धारवाड़ पुलिस द्वारा महिलाओं के प्रति अपनाए जा रहे दोस्ताना रवैये और पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम सभी के, विशेषकर महिलाओं के मनोबल को बढ़ाते हैं। हुबली-धारवाड़ के पुलिस आयुक्त एन. शशि कुमार ने बताया कि दस या उससे अधिक महिलाओं को रोजगार देने वाले सभी सरकारी और निजी कार्यालयों तथा उद्योगों में ‘शी बॉक्स’ (She Box) प्रणाली अनिवार्य रूप से स्थापित की जानी चाहिए। इससे महिलाएं गोपनीय तरीके से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगी।

आयोग की अध्यक्ष ने महिलाओं से आह्वान किया कि वे किसी भी तरह के शोषण, यौन उत्पीड़न या अन्याय का साहसपूर्वक सामना करें और ऐसे मामलों की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने महिला कर्मचारियों की चिंताओं, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें और सुनिश्चित करें कि उन्हें किसी भी तरह की असुविधा न हो।

चौधरी ने यह भी कहा कि महिलाओं को किसी भी प्रकार के अन्याय, उत्पीड़न या दुर्व्यवहार को चुपचाप सहन नहीं करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। POSH अधिनियम के तहत, दस या उससे अधिक महिला कर्मचारियों वाले संगठनों के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) का गठन अनिवार्य है। हर कार्यस्थल का यह कर्तव्य है कि वह महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करे। साथ ही, पुरुष कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी महिला सहकर्मियों के साथ उचित व्यवहार सीखें।

आयोग के प्रयास सिर्फ कार्यस्थलों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह महिलाओं और बच्चों से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी संबोधित करता है। इससे पहले, चौधरी ने कर्नाटक के सभी जिलों के उप-आयुक्तों को शैक्षणिक संस्थानों द्वारा अपनाए जा रहे सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी एकत्र करने का निर्देश दिया था, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते अपराधों के चिंताजनक रुझान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अकेले धारवाड़ जिले में पिछले तीन वर्षों में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से जुड़े 83 POCSO मामले सामने आए हैं। इनमें से कई मामले बाल विवाह, किशोरी गर्भावस्था और सामाजिक दबाव के कारण गर्भपात जैसे गंभीर मुद्दों से जुड़े थे।

धारवाड़ जिला अस्पताल के दौरे के दौरान, चौधरी ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सेवाओं और प्रतिबद्धता की सराहना की। साथ ही, उन्होंने स्टाफ की कमी और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता जैसे सुधार के क्षेत्रों की भी पहचान की। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन चिंताओं को कर्नाटक सरकार के ध्यान में लाया जाएगा।

यह पहल राज्य में कार्यस्थलों से लेकर शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक, महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने की व्यापक प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

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