उत्तर प्रदेश में गुरु गोरखनाथ के इर्द-गिर्द एक नए आध्यात्मिक गलियारे का विकास किया जाएगा। यह पहल प्रदेश में पहले से विकसित हो रहे राम, शिव और कृष्ण से जुड़े आध्यात्मिक सर्किट के नक्शेकदम पर चलेगी। अयोध्या में राम सर्किट, काशी में शिव सर्किट और मथुरा में कृष्ण सर्किट के बाद, अब नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु गोरखनाथ के नाम पर एक नए गलियारे की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य नाथ पंथ से जुड़े मंदिरों, गुफाओं और मठों को एक सुगम और एकीकृत मार्ग में जोड़ना है, ताकि श्रद्धालु और भक्त आसानी से इन पवित्र स्थलों की यात्रा कर सकें।
गोरखपुर बनेगा आध्यात्मिक केंद्र
इस नए आध्यात्मिक सर्किट का मुख्य केंद्र गोरखपुर का गोरखनाथ मंदिर होगा, जो गोरखपीठ का मुख्यालय भी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी पीठ के पीठाधीश्वर हैं। सूत्रों के अनुसार, यह गलियारा विभिन्न क्षेत्रों में फैले नाथ संप्रदाय के स्थलों को आपस में जोड़ेगा, जिससे वहां की अवसंरचना और यात्री सुविधाओं में सुधार होगा। इसका लक्ष्य एक ऐसा मार्ग तैयार करना है जो न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दे, बल्कि नाथ संप्रदाय की आध्यात्मिक विरासत के प्रति लोगों की आस्था को भी गहरा करे। नाथ संप्रदाय के अनुयायी भारत और नेपाल दोनों देशों में फैले हुए हैं।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की रणनीति
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्थिक तरक्की के लिए धार्मिक पर्यटन को एक प्रमुख जरिया मानकर उस पर ज़ोर दे रही है। आध्यात्मिक गलियारों का विकास राज्य को एक आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में स्थापित करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले, 2025 में प्रयागराज में महाकुंभ के बाद प्रदेश ने पांच नए आध्यात्मिक गलियारों की घोषणा की थी। इनमें प्रयागराज-विंध्याचल-काशी (शक्ति और शिव पूजा के लिए), प्रयागराज-अयोध्या-गोरखपुर (राम और गोरखनाथ परंपराओं से जुड़ा), प्रयागराज-लखनऊ-नैमिषारण्य मार्ग, प्रयागराज-राजपुर-चित्रकूट गलियारा, और प्रयागराज-मथुरा-वृंदावन-शुक्र तीर्थ गलियारा शामिल थे।
प्रस्तावित गुरु गोरखनाथ गलियारा बुंदेलखंड क्षेत्र के महोबा और चित्रकूट, पश्चिम में बरेली, मध्य उत्तर प्रदेश में अमेठी और अयोध्या से लेकर पूर्व में गोरखपुर और बलरामपुर तक फैले धार्मिक स्थलों को एकीकृत करेगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि गोरखपुर इस सर्किट का मुख्य केंद्र और आध्यात्मिक द्वार होगा, जो साल भर नेपाल और अन्य क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।
गोरखपुर में विकास और निवेश
गोरखपुर शहर स्वयं भी एक बड़े विकास के दौर से गुजर रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य इसे धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में और मजबूत करना है। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण गोरखपुर के प्राचीन मंदिरों के विकास और सुंदरीकरण के लिए लगभग ₹45 करोड़ की मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाना और इन ग्रामीण तीर्थस्थलों की भव्यता को फिर से स्थापित करना है। गोरखपुर में पहले से ही गोरखनाथ मंदिर, श्री दिगंबर जैन मंदिर और जटाशंकर गुरुद्वारा जैसे प्रमुख स्थल हैं, जो हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यह शहर औद्योगिक विकास के लिए भी एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है, जहाँ प्लास्टिक पार्क और गारमेंट पार्क जैसी परियोजनाएं चल रही हैं।
इन आध्यात्मिक गलियारों का विकास उत्तर प्रदेश को एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थल बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं के लिए तीर्थयात्रा को अधिक सुलभ और समृद्ध बनाना, साथ ही आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना है।
