चेन्नई: ऑनलाइन ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ एक आईटी पेशेवर को ₹14 लाख का चूना लगाया गया। यह ठगी OLX जैसे लोकप्रिय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हुई। चेन्नई की तांबरम साइबर क्राइम पुलिस ने बेंगलुरु के एक कॉल सेंटर में काम करने वाले राजेश नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पीड़ित व्यक्ति, 32 वर्षीय सतीश ने दिसंबर 2025 में इस धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी।
यह पूरा खेल तब शुरू हुआ जब OLX पर भरत नाम के एक व्यक्ति ने अपनी दो साल पुरानी कार बेचने के लिए डाली। संयोग से, सतीश भी उसी प्लेटफॉर्म पर एक पुरानी कार की तलाश में था। राजेश नामक आरोपी ने चतुराई से भरत और सतीश, दोनों से अलग-अलग संपर्क साधा। भरत को उसने गुमराह किया और बताया कि उसे कार के लिए ₹24 लाख का खरीदार मिल गया है, जो कि कार के बाज़ार मूल्य (लगभग ₹18 लाख) से काफी ज़्यादा था। वहीं, सतीश को उसने वही कार ₹14 लाख की आकर्षक कीमत पर बेचने का प्रस्ताव दिया।
सतीश, कार की कम कीमत से प्रभावित हुआ और वीडियो कॉल पर कार देखकर उसे खरीदने के लिए राज़ी हो गया। उसने राजेश को ₹14.5 लाख का भुगतान भी कर दिया। असली खेल तब सामने आया जब सतीश कार का सौदा पक्का करने के लिए अपने घर पर भरत से मिला। इसी मुलाकात में दोनों को एहसास हुआ कि उन्हें एक बिचौलिये ने ठगा है, जो पैसे लेकर फरार हो गया था।
पुलिस ने कड़ी मेहनत और बैंक लेनदेन के विस्तृत विश्लेषण के साथ-साथ टेलीकॉम रिकॉर्ड की जांच करके राजेश का पता लगाया। पूछताछ के दौरान, राजेश ने दावा किया कि उसके एक दोस्त ने शादी के लिए अपने रिश्तेदार को पैसे भेजने के नाम पर उसका बैंक खाता इस्तेमाल करने के लिए कहा था। आरोपी के पास से मिला मोबाइल फोन भी एक ऐसे शख्स का निकला जो वर्तमान में विरुudhunagar उप-जेल में बंद है, जबकि इस्तेमाल की गई सिम कार्ड अलग से खरीदी गई थी।
पुलिस को शक है कि राजेश अकेले काम नहीं कर रहा था और इस बड़ी धोखाधड़ी के पीछे एक बड़ा गिरोह हो सकता है। पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए सक्रिय रूप से जांच कर रही है। राजेश को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और पुलिस अन्य संभावित सहयोगियों की पहचान करने में जुटी हुई है। यह मामला ऑनलाइन लेन-देन, खासकर महंगी चीज़ों जैसे वाहनों की खरीद-बिक्री में जुड़े जोखिमों को उजागर करता है। ऐसे मामलों में खरीदारों को विक्रेता और बिचौलियों की पहचान की पुष्टि करना बेहद ज़रूरी है।
राजेश के साथियों और इस पूरे गोरखधंधे की गहराई का पता लगाने के लिए जांच अभी जारी है। तांबरम साइबर क्राइम विंग और अधिक सबूत जुटाने और इस रैकेट में शामिल किसी भी अन्य व्यक्ति को पकड़ने के लिए काम कर रही है। यह घटना ऑनलाइन क्लासिफाइड प्लेटफॉर्म के उपयोगकर्ताओं के बीच बढ़ती सतर्कता की आवश्यकता पर बल देती है, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके।
