तमिलनाडु: पान की फसल तबाह, किसान बेहाल, मदद की पुकार

भारततमिलनाडु: पान की फसल तबाह, किसान बेहाल, मदद की पुकार

तमिलनाडु के पान के पत्ते उगाने वाले किसानों पर क़हर टूटा है। तूफ़ानी हवाओं और अकाल वर्षा ने उनकी मेहनत की कमाई को चंद मिनटों में तबाह कर दिया है। मदुरै ज़िले के मन्नादिमंगलम, वादिपट्टी और शोलावंदन जैसे इलाकों के किसान, जिन्होंने पान की खेती पर अपनी सारी पूंजी लगा दी थी, अब बर्बाद हो चुके हैं। वे नई राज्य सरकार से तत्काल मदद और मुआवज़े की गुहार लगा रहे हैं।

किसानों पर कुदरत का कहर

हालिया प्राकृतिक आपदाओं ने पान के खेतों में तबाही मचा दी है। किसानों का कहना है कि उनकी तैयार फ़सलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। कई किसानों ने बताया कि महीनों की कड़ी मेहनत और लगाया गया सारा पैसा तूफ़ान और बारिश की भेंट चढ़ गया। इस तबाही ने किसानों को गहरे सदमे और अनिश्चितता में डाल दिया है। मन्नादिमंगलम के एक किसान ने हताशा भरे अंदाज़ में कहा, “जो पैसा लगाया था और जो मेहनत की थी, सब बेकार हो गया।”

‘द चिनाब टाइम्स’ को मिली जानकारी के अनुसार, पान के पत्ते के बड़े पैमाने पर खेत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यह फ़सल महंगी और ज़्यादा मेहनत वाली होती है। इसकी खेती अक्सर छोटे समूहों में की जाती है। पान के पत्ते उगाने की प्रक्रिया बहुत नाजुक होती है और इसमें लंबा समय लगता है। किसानों को आमतौर पर 24 से 30 महीनों तक कई फ़सलें लेनी पड़ती हैं ताकि वे अपना निवेश वसूल कर सकें और अच्छी कमाई कर सकें। सही ढंग से उगाने पर प्रति एकड़ 15 लाख रुपये तक मिल सकते हैं। लेकिन इस बार की तबाही ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है।

सरकारी मदद की गुहार

पीड़ित किसानों ने सरकार से अपनी मुश्किलों को बताते हुए ठोस मदद की अपील की है। कृषि और बागवानी विभाग के अधिकारियों ने नुकसान का जायज़ा लेने के लिए तूफ़ान प्रभावित खेतों का दौरा किया है, लेकिन किसान मुआवज़े की घोषणा का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। एक किसान ने उम्मीद जताते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि सरकार उन्हें कुछ ठोस राहत देगी।”

‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई में कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 में तूफ़ान और अकाल वर्षा से फ़सल खोने वाले किसानों को 290 करोड़ रुपये का मुआवज़ा दिया था। उस समय के मुख्यमंत्री ने डूबी हुई फ़सलों के लिए प्रति एकड़ 20,000 रुपये का भी आदेश दिया था। हालांकि, मदुरै ज़िले में हुए मौजूदा नुक़सान के बारे में अभी कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। अधिकारी ने बताया कि नई सरकार ने अभी हाल ही में कार्यभार संभाला है। इस बदलाव के दौर में किसानों को चिंता सता रही है कि कहीं राहत मिलने में देरी न हो जाए, जिससे उनकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

शोलावंदन जैसे इलाकों में पान की खेती एक महत्वपूर्ण कृषि गतिविधि रही है। एक समय में इसके उत्पाद अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों को निर्यात भी होते थे। लेकिन आज किसानों की हालत दयनीय है। कई लोग गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और बढ़ते नुक़सान से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बदलते मौसम के मिज़ाज और सिंचाई व मज़दूरी जैसे ज़्यादा खेती लागत के कारण यह काम लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है।

पान की खेती से जुड़े जोखिम, जैसे कि मौसम में ज़रा सी भी तब्दीली का असर और इस बाग़वानी उत्पाद के लिए किसी विशेष फ़सल बीमा योजना का न होना, किसानों के बोझ को और बढ़ा देता है। धान और नारियल जैसी पारंपरिक फ़सलों के विपरीत, पान की खेती कृषि बीमा योजनाओं के दायरे में नहीं आती है। ऐसे में किसान केवल सरकारी राहत पैकेजों पर निर्भर रहते हैं, जो अक्सर देरी से मिलते हैं या अपर्याप्त होते हैं। प्राकृतिक आपदाओं के समय सरकारी सहायता पर निर्भरता इस अनोखे कृषि क्षेत्र के लिए एक मज़बूत और समय पर राहत व्यवस्था की ज़रूरत को रेखांकित करती है।

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