तमिलनाडु की राजनीति में मेकदत्तू बांध परियोजना को लेकर गरमागरमी तेज हो गई है। अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) के अंतरिम महासचिव एडाप्पडी के. पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार से मेकदत्तू बांध परियोजना पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है। पलानीस्वामी ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के कांग्रेस पर कथित निर्भरता को देखते हुए राज्य के हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया है।
हमारे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पलानीस्वामी ने सोशल मीडिया पर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने विशेष रूप से डीएमके और कांग्रेस के बीच राजनीतिक समीकरणों को उजागर किया। कांग्रेस ही कर्नाटक में सत्ता में है, और मेकदत्तू परियोजना वहीं विवाद का केंद्र बनी हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान ने तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से चले आ रहे अंतर-राज्यीय जल विवाद को फिर से सुर्खियों में ला दिया है, जो दोनों राज्यों के संबंधों में हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।
कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित मेकदत्तू परियोजना का लक्ष्य कावेरी नदी पर, तमिलनाडु की सीमा के पास, मेकदत्तू गांव के निकट एक बहुउद्देशीय बांध का निर्माण करना है। कर्नाटक में परियोजना के समर्थक मानते हैं कि यह बेंगलुरु को पीने का पानी उपलब्ध कराने और जलविद्युत उत्पन्न करने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, तमिलनाडु लगातार इस परियोजना का विरोध करता रहा है। राज्य का तर्क है कि इससे कावेरी नदी से उसके पानी के हिस्से पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जो उसके कृषि क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी है।
पलानीस्वामी के सवाल ने सीधे तौर पर डीएमके सरकार के मेकदत्तू पर रुख को कांग्रेस के साथ उसके राजनीतिक गठबंधन से जोड़ा है। एआईएडीएमके नेता ने संकेत दिया कि परियोजना पर डीएमके की हिचकिचाहट या कथित निष्क्रियता का कारण कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक गठबंधन को बनाए रखने की उसकी आवश्यकता हो सकती है। कांग्रेस ही वह प्रमुख पार्टी है जो कर्नाटक सरकार में बांध के निर्माण के लिए जोर लगा रही है। यह स्थिति डीएमके को एक नाजुक राजनीतिक मोड़ पर ला खड़ा करती है, जहां उसे अपनी क्षेत्रीय राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और राष्ट्रीय गठबंधन की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और बाद में सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों ने कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी सहित नदी से लगे राज्यों के बीच कावेरी जल के बंटवारे का आदेश दिया है। मेकदत्तू परियोजना इन जल-बंटवारे व्यवस्थाओं में एक आवर्ती विवाद का बिंदु रही है। तमिलनाडु का तर्क है कि कर्नाटक द्वारा कोई भी नई परियोजना स्थापित जल-बंटवारे तंत्रों का पालन करे और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) सहित आवश्यक मंजूरी प्राप्त करे।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा होने के
