सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ईंधन बचाने के लिए वर्चुअल सुनवाई और कार-पूलिंग अब अनिवार्य
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने ईंधन की बचत को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कोर्ट ने अपने कर्मचारियों और न्यायाधीशों के लिए कई नए नियम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य पेट्रोल और डीज़ल की खपत को कम करना है। इन नियमों के तहत, अब कुछ खास दिनों में सुनवाई पूरी तरह से वर्चुअल (ऑनलाइन) माध्यम से होगी और न्यायाधीशों के बीच कार-पूलिंग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
द चिनाब टाइम्स को मिली जानकारी के अनुसार, ये निर्देश 15 मई को जारी किए गए एक सर्कुलर में विस्तार से बताए गए हैं। ये तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा 12 मई को जारी एक कार्यालय ज्ञापन का पालन करते हैं।
नए नियमों के मुताबिक, सोमवार, शुक्रवार और अन्य तय किए गए दिनों में होने वाली सभी ‘Miscellaneous’ (विविध) सुनवाईयां, साथ ही आंशिक कार्य दिवसों के लिए सूचीबद्ध मामले, केवल वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए ही आयोजित किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को यह सुनिश्चित करने का जिम्मा सौंपा गया है कि इन वर्चुअल सुनवाईयों का निर्बाध संचालन हो। इसके लिए समय पर लिंक और आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।
ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए, शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों ने आपस में कार-पूलिंग यानी एक ही गाड़ी में यात्रा करने की प्रथा को भी स्वीकार किया है। यह पहल न केवल ईंधन बचाएगी, बल्कि सड़कों पर वाहनों की संख्या को भी कम करने में मदद करेगी, जिससे यातायात जाम की समस्या में भी कुछ राहत मिल सकती है।
सर्कुलर में यह भी बताया गया है कि रजिस्ट्री के प्रत्येक विभाग या अनुभाग में 50 प्रतिशत तक कर्मचारी, अगली सूचना तक, सप्ताह में अधिकतम दो दिन घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) कर सकते हैं। इस कदम का उद्देश्य कार्यालय में पर्याप्त उपस्थिति बनाए रखना है ताकि अदालती कामकाज में कोई बाधा न आए।
रजिस्ट्रारों को निर्देश दिया गया है कि वे साप्ताहिक ड्यूटी रोस्टर पहले से तैयार करें और यह सुनिश्चित करें कि आधिकारिक कार्य समय पर पूरे हों। जो कर्मचारी घर से काम करेंगे, उन्हें फोन पर उपलब्ध रहना होगा और आवश्यकता पड़ने पर कार्यालय में रिपोर्ट करना होगा।
संबंधित रजिस्ट्रार को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे बदलती परिचालन आवश्यकताओं और ज़रूरतों के आधार पर किसी भी अनुभाग के लिए घर से काम करने की व्यवस्थाओं को संशोधित या रद्द कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि कर्मचारियों के लचीलेपन के साथ-साथ अदालती कामकाज की निरंतरता बनी रहे।
यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक पहल है, बल्कि यह अदालती प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने और तकनीकी रूप से उन्नत करने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।
