तमिलनाडु का नया मंत्रिमंडल: अनुसूचित जाति के सदस्यों की ऐतिहासिक भागीदारी
चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाले नवगठित मंत्रिमंडल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद, अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के सदस्यों की संख्या सात हो गई है, जो अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी है। यह राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार ने सामाजिक न्याय के लिए नया मानदंड स्थापित किया
गुरुवार, 21 मई 2026 को चेन्नई के राजभवन में आयोजित मंत्रिमंडल विस्तार समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार के बाद, मुख्यमंत्री विजय के मंत्रिमंडल की कुल सदस्य संख्या 33 हो गई है, जबकि 35 की स्वीकृत संख्या में दो पद अभी भी खाली हैं। इस कदम को राज्य सरकार में सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रगतिशील प्रयास के रूप में सराहा जा रहा है।
‘द चिनाब टाइम्स’ को मिली जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु के किसी भी मंत्रिमंडल में एससी समुदाय के सदस्यों की पिछली सर्वाधिक भागीदारी चार थी, जो 2024 में एम.के. स्टालिन के कार्यकाल में हुई थी। वर्तमान मंत्रिमंडल इस रिकॉर्ड को पार करते हुए सात एससी मंत्रियों के साथ एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। यह वृद्धि राज्य की जनसांख्यिकीय विविधता को शासन संरचना में प्रतिबिंबित करने के एक सुनियोजित प्रयास को रेखांकित करती है।
प्रमुख नियुक्तियाँ और विभागों का बँटवारा
अनुसूचित जाति समुदाय से प्रमुख नियुक्तियों में अविनाशी से एस. कमली, अराककोनम से वी. गंधिराज, ओट्टापिदारम से पी. मथन राजा, रासीपुरम से डी. लोकेश तमिलसेल्वन और श्रीपेरुम्बुदुर से के. तेन्नरसु शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस विधायक पी. विश्वनाथन, जो मेलूर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे भी एससी समुदाय से हैं और उन्हें उच्च शिक्षा विभाग का जिम्मा सौंपा गया है। पहले शपथ लेने वाले राजमोहन स्कूल शिक्षा विभाग का कार्यभार संभाल रहे हैं, जिससे शिक्षा से जुड़े दोनों महत्वपूर्ण विभाग एससी सदस्यों को आवंटित हुए हैं।
इस विस्तार में चार महिला मंत्रियों को भी शामिल किया गया है, जो एक और राज्य रिकॉर्ड है। यह 2011-2016 तक जे. जयललिता के नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक सरकार के दौरान तीन महिला मंत्रियों के पिछले रिकॉर्ड को पार करता है। इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का समावेश शासन में लैंगिक समानता के प्रति व्यापक प्रतिबद्धता को उजागर करता है।
राजनीतिक संदर्भ और गठबंधन की गतिशीलता
2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद बनी तमिलनाडु वेट्टी कज़गम (टीवीके) के नेतृत्व वाली सरकार सक्रिय रूप से गठबंधन बना रही है। टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीती हैं, जिससे कांग्रेस, सीपीआई-एम, सीपीआई, वीसीके और आईयूएमएल सहित सहयोगी दलों के समर्थन की आवश्यकता पड़ी है। हालिया मंत्रिमंडल विस्तार नए सहयोगियों के एकीकरण को भी दर्शाता है, जिसमें विदुथलाई चिरुथाईगल कज़गम (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) पहली बार सरकार का हिस्सा बने हैं।
वीसीके से वन्नी अरसु और आईयूएमएल से ए.एम. शाहजहाँ को शामिल करने से मंत्रिमंडल और भी विविध हो गया है। वन्नी अरसु को आदि द्रविड़ कल्याण और पहाड़ी जनजातीय विभाग सौंपा गया है, जिसे अब सामाजिक न्याय मंत्री के रूप में जाना जाएगा, जबकि शाहजहाँ अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के रूप में कार्य करेंगे। ये नियुक्तियाँ राज्य के भीतर विभिन्न समुदायों की विशिष्ट आवश्यकताओं और चिंताओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
एससी प्रतिनिधित्व का ऐतिहासिक महत्व
राज्य मंत्रिमंडल में एससी समुदाय के व्यक्तियों की उपस्थिति मद्रास प्रेसीडेंसी काल से चली आ रही है। हालांकि, वर्तमान विस्तार समावेश के एक अभूतपूर्व स्तर का प्रतिनिधित्व करता है। राजनीतिक विश्लेषकों ने नोट किया है कि मंत्रिमंडल में सात एससी सदस्यों का होना एक प्रगतिशील बदलाव है, जो एक परिपक्व राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाता है जो तेजी से विविधता और सामाजिक समावेशन को महत्व दे रहा है। इस नए मंत्रिमंडल में मंत्रियों की औसत आयु भी एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत देती है, जिसमें बड़ी संख्या में मंत्री 50 वर्ष से कम आयु के हैं, जो तमिलनाडु की राजनीति में युवा नेतृत्व की ओर एक कदम का सुझाव देता है।
