महाराष्ट्र की दो सांसद, मेधा कुलकर्णी और स्मिता उदय वाघ को 2026 के प्रतिष्ठित ‘संसद रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान संसद में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया गया है। ये पुरस्कार उस निष्ठा और लगन को पहचान देते हैं जो सांसदों ने संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने में दिखाई है।
‘संसद रत्न’ पुरस्कारों की शुरुआत 2010 में प्राइम पॉइंट फाउंडेशन ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सुझाव पर की थी। इसका मकसद उन सांसदों को सम्मानित करना है जिन्होंने अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन किया है। पुरस्कारों के लिए सांसदों का चयन उनके प्रदर्शन के आंकड़ों के आधार पर होता है, जिसमें चर्चाओं में हिस्सा लेना, निजी सदस्य विधेयक पेश करना, उठाए गए सवाल और सदन में उपस्थिति जैसे पैमाने शामिल हैं। एक जूरी समिति, जिसमें अनुभवी सांसद और संवैधानिक विशेषज्ञ शामिल होते हैं, इन आंकड़ों की समीक्षा कर योग्यता के आधार पर विजेताओं का चयन करती है।
इस वर्ष, 10 लोकसभा सांसदों, 2 राज्यसभा सांसदों और 4 संसदीय स्थायी समितियों को ‘संसद रत्न’ पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है। महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी (भारतीय जनता पार्टी) और जलगांव से सांसद स्मिता उदय वाघ (भाजपा) भी इस सूची में शामिल हैं। यह सम्मान उनके विधायी कार्यों और संसदीय गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।
पुणे की मेधा कुलकर्णी, जो महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य भी रह चुकी हैं, को संसदीय जिम्मेदारियों में उनके प्रदर्शन के लिए सराहा गया है। राज्यसभा में आने से पहले, उन्होंने विधायक के तौर पर भी जनसेवा में अपनी प्रतिबद्धता दिखाई थी।
वहीं, स्मिता उदय वाघ, जो तीन दशक से अधिक समय से भाजपा से जुड़ी हैं, का राजनीतिक सफर काफी मजबूत रहा है। उन्होंने पार्टी के महिला मोर्चा में नेतृत्व की भूमिका निभाई है और जलगांव जिला परिषद की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र में बांध निर्माण और कृषि ढांचे को बेहतर बनाने जैसे विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया है। खास बात यह है कि कैंसर से जूझते हुए भी उन्होंने संसदीय कार्यवाही में सक्रियता बनाए रखी।
‘संसद रत्न’ पुरस्कारों की एक लंबी परंपरा रही है। पहली बार यह पुरस्कार मई 2010 में चेन्नई में दिए गए थे। समय के साथ, यह पुरस्कार समारोह विभिन्न स्थानों पर आयोजित हुए हैं, जिनमें आईआईटी मद्रास और नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया और महाराष्ट्र सदन शामिल हैं। 2025 में आयोजित 15वें संस्करण तक, कुल 143 पुरस्कार व्यक्तिगत सांसदों और संसदीय स्थायी समितियों को दिए जा चुके हैं।
पुरस्कारों के लिए चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और मेरिट को प्रमुखता दी जाती है। इसमें चर्चाओं की संख्या, निजी सदस्य विधेयक, उठाए गए प्रश्न और पेश की गई समितियों की रिपोर्ट जैसे वस्तुनिष्ठ पैमाने शामिल हैं। जूरी समिति का निर्णय अंतिम होता है, जिससे चयन प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है।
प्राइम पॉइंट फाउंडेशन, जिसने इन पुरस्कारों की शुरुआत की है, का उद्देश्य संसद के सुचारू संचालन में योगदान देने वाले सांसदों के कड़े परिश्रम और समर्पण को मान्यता देना है। यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा नहीं दिए जाते, बल्कि यह एक नागरिक समाज की पहल है जो संसदीय उपलब्धियों का जश्न मनाती है। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से प्रेरित यह पहल संसद में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित करने की दृष्टि से शुरू की गई थी। इन पुरस्कारों को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया है और अतीत में पुरस्कार विजेताओं को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
2026 के पुरस्कार विजेताओं की सूची में वे सभी सम्मानित सांसद शामिल हो गए हैं जिन्होंने अपने योगदान के लिए पहचान हासिल की है। यह चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि पुरस्कार वास्तविक संसदीय प्रदर्शन को दर्शाते हैं, जिससे सदस्यों को विधायी प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने और लोकतांत्रिक शासन के मानकों को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। इस वर्ष महाराष्ट्र की दो महिला सांसदों का इस सूची में शामिल होना भारतीय राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और प्रभाव को रेखांकित करता है।
‘संसद रत्न’ पुरस्कार, लोक सेवा में प्रदर्शन-आधारित मान्यता के महत्व का प्रमाण हैं। यह सांसदों को अपने विधायी कर्तव्यों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं और भारत में एक मजबूत तथा प्रभावी संसदीय लोकतंत्र में योगदान देते हैं।
