AI का कमाल: मैसूर में छपी पहली AI-अनुवादित किताब, प्रकाशन में नया मील का पत्थर

तकनीकAI का कमाल: मैसूर में छपी पहली AI-अनुवादित किताब, प्रकाशन में नया मील का पत्थर

मैसूर से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। यहाँ भारत की पहली पूरी लंबाई वाली गैर-काल्पनिक किताब का विमोचन होने जा रहा है, जिसका कन्नड़ में अनुवाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किया गया है। यह किताब इतिहासकार विक्रम संपत की गौहर जान पर लिखी जीवनी का कन्नड़ संस्करण है। इस किताब का मूल शीर्षक ‘My Name Is Gauhar Jaan: The Life and Times of a Musician’ है। मैसूर के सांसद यदुवीर वाडियार इस किताब का विमोचन करेंगे।

यह भारतीय प्रकाशन जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह देश की पहली ऐसी पूरी किताब है जिसका अनुवाद न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ किया गया है। यह कमाल बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ‘नाव एआई’ (Naav AI) की ट्रांसलिट (TransLit) तकनीक से हुआ है।

गौहर जान, जो एक महान हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार थीं और 1902 में ग्रामोफोन पर अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करने वाली उपमहाद्वीप की पहली महिला कलाकार थीं, उनकी जीवनी के इस AI-सहायता प्राप्त अनुवाद की सटीकता लगभग 80% बताई जा रही है। इसके बाद मानव अनुवादकों ने इसे और बेहतर बनाया। विक्रम संपत ने बताया कि इस तरह की किताब का पारंपरिक रूप से मानव द्वारा अनुवाद करने में करीब छह महीने लग जाते, लेकिन AI की मदद से यह काम सिर्फ तीन से चार हफ्तों में पूरा हो गया। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में मूल किताब की लय, शैली और साहित्यिक गुणवत्ता बरकरार रही। संपत कन्नड़ संस्करण से इतने संतुष्ट हैं कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे उन्होंने खुद यह किताब लिखी हो।

क्षेत्रीय भाषाओं के लिए AI अनुवाद में ‘नाव एआई’ का नेतृत्व

विक्रम संपत और प्रौद्योगिकी कार्यकारी संदीप सिंह चौहान द्वारा सह-स्थापित ‘नाव एआई’ का उद्देश्य भारतीय प्रकाशन उद्योग में क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद को लेकर आने वाली देरी और भारी लागत की समस्या को दूर करना है। इस स्टार्टअप का ट्रांसलिट प्लेटफॉर्म खास तौर पर किताबों जैसे लंबे पाठ के लिए बनाया गया है। यह पूरी पांडुलिपि को संसाधित करता है और अर्थ की निरंतरता बनाए रखता है। प्रकाशक अपनी पांडुलिपि अपलोड कर सकते हैं, और AI उसका एक मसौदा अनुवाद तैयार करता है। इसके बाद पेशेवर भाषा विशेषज्ञ इसकी समीक्षा और सुधार करते हैं, इस तरह AI और मानव सहयोग का एक मिश्रित मॉडल तैयार होता है।

AI अनुवाद के व्यापक प्रभाव और चुनौतियाँ

इस पहल ने क्षेत्रीय भाषा प्रकाशनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर व्यापक बहस छेड़ दी है। जहाँ इसके समर्थक क्षेत्रीय भाषाओं के पाठकों के लिए गति और सुलभता में वृद्धि की बात कर रहे हैं, वहीं आलोचक बारीकियों, लेखकत्व और मानव अनुवादकों के भविष्य को लेकर चिंताएं जता रहे हैं। ‘नाव एआई’ पहले भी भारतीय भाषाओं में AI अनुवाद पर काम कर चुका है। इसने प्रकाशन भागीदारों के सहयोग से कई बच्चों की इतिहास की किताबों का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया है। कंपनी अपनी तकनीक के व्यापक उपयोग की कल्पना करती है, जिसमें शैक्षिक सामग्री, सरकारी दस्तावेज और डिजिटल सामग्री का अनुवाद भी शामिल है।

AI-अनुवादित कन्नड़ किताब का विमोचन भारत के विविध भाषाई परिदृश्य में साहित्य के आदान-प्रदान के तरीके में एक संभावित बदलाव का संकेत देता है। यह विकास ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय भाषाओं के लिए AI अनुवाद को बेहतर बनाने के अन्य प्रयास भी किए जा रहे हैं। मैसूर स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज (CIIL) ने भी विभिन्न भारतीय भाषाओं के लिए सुलभता बढ़ाने के उद्देश्य से अनुवाद और लिप्यंतरण के लिए AI उपकरण लॉन्च किए हैं। इसके अलावा, कन्नड़ डेवलपमेंट अथॉरिटी (KDA) भी कई कन्नड़ शब्दकोशों से शब्दों को शामिल करके कन्नड़-अंग्रेजी अनुवाद की सटीकता में सुधार करने के इरादे से अपने स्वयं के अनुवाद इंजन विकसित कर रही है।

हालांकि, कन्नड़ सहित भारतीय भाषाओं के लिए AI अनुवाद की सटीकता में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं। मेटा जैसी टेक कंपनियों को अपने प्लेटफार्मों पर गलत कन्नड़ अनुवाद के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है और माफी मांगी है। इसके चलते सुधार होने तक और भाषा विशेषज्ञों के साथ सहयोग करने तक ऑटो-ट्रांसलेशन सुविधाओं को अस्थायी रूप से निलंबित करने की मांग की गई है। विशेषज्ञ बेहतर गुणवत्ता और प्रासंगिक सटीकता सुनिश्चित करने के लिए, जनजातीय और अल्पसंख्यक भाषाओं सहित, क्षेत्रीय भाषाओं के लिए अधिक व्यापक प्रशिक्षण डेटा और विशेष रूप से तैयार किए गए भाषा मॉडल के विकास की आवश्यकता पर जोर देते हैं।

मैसूर के लिए ऐतिहासिक महत्व

जिस गौहर जान की यह जीवनी है, वह एक प्रतिष्ठित संगीतकार थीं जिन्होंने अपने जीवन का अंतिम चरण मैसूर में बिताया और वहीं 1930 में उनका निधन हो गया। मैसूर में इस किताब का विमोचन शहर के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है, जो इस महान कलाकार से शहर के जुड़ाव को दर्शाता है।

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