सेना प्रमुख का ‘स्मार्ट पावर’ मंत्र, सिंधूर ऑपरेशन ने दी नई दिशा

भारतसेना प्रमुख का 'स्मार्ट पावर' मंत्र, सिंधूर ऑपरेशन ने दी नई दिशा

नई दिल्ली, 19 मई: भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि हाल ही में संपन्न हुआ ‘ऑपरेशन सिंधूर’ ‘स्मार्ट पावर’ का एक बेहतरीन उदाहरण था। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में राष्ट्रीय शक्ति का सटीक और योजनाबद्ध इस्तेमाल किया गया, जिसने आतंकवाद के ठिकानों को ध्वस्त किया और मौजूदा रणनीतिक मान्यताओं को चुनौती दी। ऑपरेशन एक सोचे-समझे विराम के साथ समाप्त हुआ, जो रणनीतिक समझ और समन्वित राष्ट्रीय कार्रवाई का प्रतीक था।

‘द चिनाब टाइम्स’ को मिली जानकारी के अनुसार, जनरल द्विवेदी ने मानेकशॉ सेंटर में ‘सुरक्षा से समृद्धि: सतत राष्ट्रीय विकास के लिए स्मार्ट पावर’ नामक एक सेमिनार में इस ऑपरेशन के महत्व पर प्रकाश डाला। यह ऑपरेशन 6-7 मई, 2025 की रात को अंजाम दिया गया था। उन्होंने इसे केवल 22 मिनट का एक त्वरित अभियान बताया, जिसमें सैन्य सटीकता, सूचना नियंत्रण, राजनयिक संकेत और आर्थिक दृढ़ संकल्प को एक साथ मिलाकर एक राष्ट्रीय कृत्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। जनरल द्विवेदी ने यह भी बताया कि ऑपरेशन के शुरुआती चरण के बाद जानबूझकर लिया गया ठहराव इसके प्रभाव को बढ़ाने में सहायक रहा, जिससे आगे की रणनीति के आकलन और समायोजन का अवसर मिला।

सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (CLAWS) द्वारा आयोजित इस सेमिनार में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, सेवानिवृत्त अफसरों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें राष्ट्रीय विकास के संदर्भ में ‘स्मार्ट पावर’ की बदलती अवधारणा पर चर्चा की गई। जनरल द्विवेदी ने वैश्विक परिदृश्य की जटिलताओं पर जोर दिया, जहां अव्यवस्था और अविश्वास का माहौल है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में शक्ति की राजनीति समृद्धि को बढ़ाने के बजाय संघर्ष को रोकने के बजाय उसे एक नया आकार दे रही है।

सेना प्रमुख ने यह सवाल भी उठाया कि क्या ‘स्मार्ट पावर’ अभी भी राष्ट्रीय विकास का मुख्य चालक बना हुआ है, या ‘हार्ड पावर’ (पारंपरिक सैन्य शक्ति) के सिद्धांत फिर से हावी हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था को समझने के लिए किसी भी पूर्वाग्रह से मुक्त होकर निष्पक्ष मूल्यांकन की आवश्यकता है। उन्होंने वैश्वीकरण के विरोधाभास की ओर इशारा किया, जहाँ देशों को जोड़ने के उद्देश्य से बने तंत्र अब दबाव बनाने के साधन बनते जा रहे हैं। उन्होंने सेमीकंडक्टर जैसे तकनीकी उपकरणों और विवादित शिपिंग मार्गों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे शक्ति संतुलन वैश्विक व्यापार और सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है।

जनरल द्विवेदी ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा और समृद्धि के बीच की रेखा धुंधली हो गई है। आज के संघर्षों में न केवल सशस्त्र बलों पर, बल्कि औद्योगिक उत्पादन, अनुसंधान और शासन पर भी लगातार दबाव बना रहता है। उन्होंने कहा कि अब सुरक्षा समृद्धि के लिए एक पूर्व शर्त बन गई है, न कि वह लागत जिसे समृद्धि को वहन करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ‘स्मार्ट पावर’ रणनीति को इस खंडित, तेजी से बदलते और अक्षम्य वैश्विक वातावरण में आगे बढ़ने के लिए तैयार किया जाना चाहिए।

जोसेफ न्ये के ‘स्मार्ट पावर’ के सिद्धांत का हवाला देते हुए, जिसमें राष्ट्रीय शक्ति के साधनों का सटीक और सुसंगत रूप से उपयोग करने की रणनीतिक बुद्धिमत्ता शामिल है, जनरल द्विवेदी ने भारत के दृष्टिकोण को संक्षेप में प्रस्तुत करने के लिए ‘SMART’ नामक एक संक्षिप्त रूप (acronym) प्रस्तावित किया। उन्होंने बताया कि यह ढांचा केवल एक प्रबंधन संरचना नहीं है, बल्कि वर्तमान भू-राजनीतिक जलवायु में सोचने, तैयारी करने और कार्य करने की एक जीवंत रणनीति है। SMART में ‘S’ का अर्थ है स्टेटक्राफ्ट (Statecraft), जो कूटनीतिक, सूचनात्मक, सैन्य और आर्थिक उपकरणों के समन्वयित उपयोग में महारत पर जोर देता है। ‘M’ का मतलब मैन्युफैक्चरिंग डेप्थ (Manufacturing Depth) है, जो उत्पादन में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता को रेखांकित करता है, खासकर जब आपूर्ति श्रृंखलाएं खंडित हो रही हैं और प्रौद्योगिकी का तेजी से हथियार के रूप में उपयोग हो रहा है।

‘A’ का अर्थ है एक्सेलेरेटिंग इनोवेशन (Accelerating Innovation), जो आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति के लिए राष्ट्रीय पहलों के साथ संरेखित होता है। ‘R’ का अर्थ है रेसिलीएंस (Resilience), जो जटिल चुनौतियों का सामना करने के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है। अंत में, ‘T’ का अर्थ है टेक्नोलॉजी प्राइमेसी (Technology Primacy), जो यह बताता है कि भविष्य के संघर्षों के परिणाम प्रौद्योगिकी में प्रभुत्व से तय होंगे। जनरल द्विवेदी ने भारत से आग्रह किया कि वह न केवल उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाए, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और वैश्विक माहौल को अपने पक्ष में आकार देने के लिए उन्हें स्वदेशी बनाए, उनका संचालन करे और उनके विकास में नेतृत्व करे।

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