सपा ने आई-पैक से तोड़ा नाता, पैसों की तंगी बनी वजह।

भारतसपा ने आई-पैक से तोड़ा नाता, पैसों की तंगी बनी वजह।

सपा ने आई-पैक से नाता तोड़ा, वजह बनी पैसों की तंगी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी (सपा) ने राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक (I-PAC) के साथ अपना अनुबंध समाप्त कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को खुद इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि वित्तीय तंगी के कारण यह फैसला लिया गया है। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि यह कदम हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों से जुड़ा है, बल्कि जोर देकर कहा कि पैसों की कमी ही अलगाव का एकमात्र कारण है।

‘द चिनाब टाइम्स’ को मिली जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव ने आई-पैक के साथ पिछले कुछ समय से चल रहे जुड़ाव को खत्म करने का ऐलान किया। पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए आई-पैक को अनुबंधित किया था। हालांकि, पार्टी की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं रही कि वह इस सहयोग को जारी रख सके। यादव ने यहाँ तक कह दिया कि अगर मीडिया वाले पैसे दे दें, तो शायद पार्टी किसी और कंपनी को हायर करने के बारे में सोच सकती है। इससे पार्टी की आर्थिक परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब आई-पैक खुद कई आरोपों से घिरी हुई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले से ही फर्म के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रहा है। ईडी ने आई-पैक के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को बंगाल कोयला तस्करी मामले से जुड़े कथित वित्तीय गड़बड़ियों के सिलसिले में गिरफ्तार भी किया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि फर्म ने काले धन को सफेद करने के लिए एक वित्तीय मॉडल का इस्तेमाल किया, जिसमें भुगतान बैंकिंग माध्यमों और नकद दोनों तरह से प्राप्त हुए थे। हालांकि, चंदेल को पिछले हफ्ते जमानत मिल गई थी। अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर ईडी की जांच को अपने फैसले से नहीं जोड़ा है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद पार्टी के भीतर आई-पैक की क्षमता पर सवाल उठने लगे थे, खासकर ऐसे वक्त में जब एक हाई-प्रेशर चुनाव अभियान को संभालना हो।

सपा ने आई-पैक का साथ भले ही छोड़ दिया हो, लेकिन यह भी खबर है कि पार्टी अभी भी एक अन्य चुनाव प्रबंधन और सोशल मीडिया कंसल्टेंसी, ‘शो-टाइम’ के साथ काम कर रही है। इस कंपनी के साथ करीब दो महीने पहले ही समझौता हुआ था। आई-पैक अपनी पूरी ताकत उन सीटों पर लगा रही थी जहाँ पिछले विधानसभा चुनावों में सपा को बहुत कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। उत्तर प्रदेश के लिए नियुक्त आई-पैक टीम के कई सदस्य कथित तौर पर राज्य के बाहर से काम कर रहे थे।

आई-पैक के साथ अनुबंध खत्म करना सपा के लिए एक बड़ी रणनीतिक बदलाव है, खासकर जब पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश चुनावों की तैयारी कर रही है। पार्टी नेतृत्व इन घटनाक्रमों के मद्देनजर अपनी अभियान रणनीति और वित्तीय प्रबंधन का पुनर्मूल्यांकन करता नजर आ रहा है। सपा का लक्ष्य राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ अपने अभियान को तेज करना है, जिसमें बेरोजगारी, जातिगत जनगणना, कानून-व्यवस्था और किसानों की चिंता जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व अब भविष्य की अभियान योजनाओं के लिए बाहरी परामर्श फर्मों पर निर्भर रहने के बजाय अपने आंतरिक संगठनात्मक ढांचे और राजनीतिक मशीनरी को मजबूत करने का इरादा रखता है। यह कदम पार्टी के संचालन ढांचे के भीतर आंतरिक संसाधनों के अनुकूलन और वित्तीय जिम्मेदारी पर एक नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने का संकेत देता है।

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