आयात शुल्क बढ़ा, सोना-चांदी हुआ महंगा, भावों में आई तेज़ी।

भारतआयात शुल्क बढ़ा, सोना-चांदी हुआ महंगा, भावों में आई तेज़ी।

सोने-चांदी की कीमतों में उछाल, सरकार ने बढ़ाई आयात शुल्क

नई दिल्ली: बुधवार को भारत में सोना और चांदी की कीमतों में अचानक तेज़ी देखी गई। केंद्र सरकार द्वारा कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में की गई वृद्धि का सीधा असर घरेलू बाज़ारों पर पड़ा है।

द चिनाब टाइम्स को मिली जानकारी के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के वायदा भाव में लगभग 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे यह 10 ग्राम के लिए करीब 1.62 लाख रुपये तक पहुँच गया। वहीं, चांदी के वायदा भाव में भी 6 प्रतिशत से अधिक की तेज़ी देखी गई और यह प्रति किलोग्राम लगभग 2.96 लाख रुपये पर कारोबार कर रहा था।

कीमतों में यह उछाल सरकार के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। विभिन्न वित्तीय समाचार माध्यमों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य आयात को नियंत्रित करना है, ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को कम किया जा सके और बढ़ते व्यापार घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिल सके।

भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है, और इसकी आयात नीतियों में कोई भी बदलाव घरेलू बाज़ार की कीमतों पर तुरंत और स्पष्ट प्रभाव डालता है। बढ़े हुए शुल्क के कारण आयातित सोना और चांदी अब महंगे हो जाएंगे, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं के लिए खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में दिखेगा।

रुपये में मामूली सुधार, पर दबाव बरकरार

बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली सुधरता हुआ नज़र आया। सुबह लगभग 11 बजे यह करीब 95.5 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इससे एक दिन पहले, मंगलवार को रुपया रिकॉर्ड स्तर से गिरकर 95.6 के स्तर तक पहुँच गया था। वैश्विक स्तर पर बढ़ती तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों से उत्पन्न भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते भारतीय मुद्रा पर लगातार दबाव बना हुआ है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और शेयर बाज़ार का हाल

मंगलवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही। यह फरवरी के अंत के आंकड़ों से काफी ज़्यादा है, जब क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से पहले यह लगभग 78 डॉलर प्रति बैरल पर था। तेल की लगातार ऊंची कीमतें महंगाई के दबाव को बढ़ाती हैं और भारत के आयात बिल को प्रभावित करती हैं।

भारतीय शेयर बाज़ारों में बुधवार को मिला-जुला रुख देखा गया। सुबह 11 बजे तक सेंसेक्स में 0.07 प्रतिशत की मामूली गिरावट थी, जबकि निफ्टी में 0.06 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई। पिछले दिन, मंगलवार को बाज़ार लगातार चौथे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिससे निवेशकों की संपत्ति 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक कम हो गई थी।

बाज़ार की अस्थिरता में भी बढ़त देखी गई, जिसमें इंडिया VIX इंडेक्स, जो बाज़ार में अपेक्षित उतार-चढ़ाव को मापता है, 2.1 प्रतिशत बढ़ा। यह वृद्धि वर्तमान आर्थिक और भू-राजनीतिक माहौल में निवेशकों के बीच सतर्कता का संकेत देती है।

एशियाई बाज़ारों में मिश्रित चाल

मंगलवार को एशियाई बाज़ारों में भी मिश्रित रुझान देखने को मिला। हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 0.06 प्रतिशत बढ़ा, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.2 प्रतिशत चढ़ा, चीन का शंघाई कंपोजिट 0.3 प्रतिशत बढ़ा, और जापान का निक्केई सूचकांक 0.8 प्रतिशत चढ़ा। ये क्षेत्रीय रुझान भारत में देखे गए वित्तीय बाज़ार की गतिशीलता के लिए एक व्यापक संदर्भ प्रदान करते हैं।

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