डीजल ‘महंगा’, बस किराया ‘तेज’, यात्री ‘परेशान’!

भारतडीजल 'महंगा', बस किराया 'तेज', यात्री 'परेशान'!

दक्षिण कन्नड़ ज़िले में निजी बस ऑपरेटरों की ओर से किराया बढ़ाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। डीजल और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। इस बाबत 19 मई को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें दक्षिण कन्नड़ बस ओनर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि किराए में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श कर अंतिम निर्णय लेंगे।

दरअसल, हाल के दिनों में डीजल की कीमतों में आई उछाल ने निजी बस सेवाओं के परिचालन पर भारी बोझ डाला है। सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक भर में निजी बस ऑपरेटर 20 से 30 फीसदी तक किराया बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। कुछ ऑपरेटरों ने तो बेंगलुरु-मंगलुरु जैसे व्यस्त मार्गों पर पहले ही बढ़ी हुई दरें लागू कर दी हैं, जहाँ किराया करीब 899 रुपये से बढ़कर 1100 से 1200 रुपये के बीच पहुँच गया है।

उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण ऑपरेटरों के सामने एक विकट स्थिति आ खड़ी हुई है। हर दिन के हिसाब से उनका खर्च काफी बढ़ गया है। अनुमान है कि एक निजी बस को प्रतिदिन लगभग 150 लीटर डीजल की खपत होती है। कीमतों में ताजा बढ़ोतरी के बाद, प्रति ट्रिप लगभग 450 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। परिचालन लागत में हो रही इस लगातार वृद्धि के चलते कई बस मालिकों को अपना व्यवसाय बनाए रखने के लिए किराए में बढ़ोतरी को अनिवार्य मानना पड़ रहा है।

कर्नाटक राज्य निजी बस ओनर्स एसोसिएशन ने यह भी साफ किया है कि सिर्फ ईंधन की कीमतें ही उनके सामने चुनौती नहीं हैं। रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन और परमिट से जुड़े खर्चों में भी वृद्धि हुई है, जो परिवहन क्षेत्र पर दबाव बढ़ा रहे हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चल रही अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को भी ईंधन की बढ़ती कीमतों से जोड़ा जा रहा है, जिससे परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

किराये में प्रस्तावित वृद्धि का असर आम यात्रियों पर पड़ना तय है। दैनिक यात्री, छात्र और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोग, जो निजी बसों पर निर्भर हैं, उन्हें बढ़ी हुई किराए का भुगतान करना होगा। कई यात्रियों ने बढ़ती महंगाई के बीच परिवहन खर्च में बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताई है, उनका कहना है कि इससे पहले से ही बोझ तले दबे घरेलू बजट पर और अधिक दबाव पड़ेगा। इस स्थिति को ‘शक्ति योजना’ और भी जटिल बना रही है, जिसके तहत सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती है। ऐसे में निजी ऑपरेटरों के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

जहां निजी ऑपरेटर किराए में बढ़ोतरी के विकल्प तलाश रहे हैं, वहीं कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी बसों के किराए में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी। परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बताया कि राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) जैसी सरकारी बसों के किराए में बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने यह भी साफ किया कि राज्य के परमिट वाली बसों के किराए में किसी भी तरह का संशोधन जिला स्तर पर उप-मंडल अधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा ही किया जाएगा। मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि फिलहाल सिर्फ ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (AITP) वाले ऑपरेटर ही किराए बढ़ा रहे हैं और सरकार इस स्थिति पर नजर रखे हुए है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकारी बसों का किराया नहीं बढ़ाया जाएगा, भले ही निगम को घाटा ही क्यों न उठाना पड़े, ताकि आम जनता पर बोझ न पड़े।

किराए में बढ़ोतरी के अलावा, अन्य परिवहन क्षेत्रों में भी बदलाव की चर्चाएं चल रही हैं। शिक्षा परिवहन क्षेत्र में किराए में लगभग 10 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। इसके अलावा, यात्री वाहनों और पर्यटक परिवहन सेवाओं के किराए में भी अगले कुछ दिनों में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। कैब एग्रीगेटर सेवाओं, जैसे ओला और उबर, के किराए में संभावित बदलावों पर भी ड्राइवर संघों द्वारा बैठकें की जा रही हैं।

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